। सृष्टि जगह छेकैत छैक।
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सृष्टि होइत छैक तं ओ जगह छेकैत छैक।
गाछ ज'ड़ि भरि भूमि,
शिशु मायक गर्भ आ कोरा,
विचार मस्तिष्कक केंद्र छेकैत छैक-भाषा में।
किछु ने किछु लैये क’ होइत अछि-सृष्टि !
कवि अक्षर भरि कागत लैत छथि आ कलम भरि मोसि !
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गंगेश गुंजन
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