कवि अप्रैल 09, 2019 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप 🌈 रहब तं कहबे करब कहय लय रहबे करब। यावत मोनक संसार बनत ने चलि-चलि क' एक की,एक सय बेर कवि छी हम, अबिते रहब। 🌞 गंगेश गुंजन टिप्पणियाँ
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