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उड़ीसाक फानी बिहाड़ि आ मैथिली साहित्य-पुरस्कारक प्रकरण।
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आशीष अनचिन्हार जी साहित्यिक पुरस्कार प्रणाली आ संस्था,सब पर उचिते पितायल रहैत छथिन। यथा योग्य आ प्रसंग पर तत्पर रहि क' अपन प्रतिरोधक ऊंच स्वर सेहो उठबैत रहैत छथि।साकांक्ष रहबाक हुनक एहि गुणक बहुत लोक संगें हमहूं प्रशंसक छी।
हालहि अनचिन्हार जी एही क्रम मे फेसबुक पर मैथिली साहित्य पुरस्कार विषयक एक टा टटका “फानी”अभिमत देलथिन जे:
“पुरस्कार देबऽ बला संस्था आ लेबए बला लेखक,सभकेँ एखन रस्सीसँ बान्हि कऽ उड़ीसाक बिहाड़िमे छोड़ि देबाक चाही!”
आ कि ई पढ़ितहिं एक अओर प्रौढ़ मैथिल प्रत्याशी कवि,हमर पड़ोसिया अन्चिनहार जी के रुच्छ होइत पूछलखिन-
-ताहि सं अहां कें ? अगिला पुरस्कार अहीं कें भेट’ लागय तकर कोन गारेंटी ?’
-कियेक आब अहूं रेस मे छियैक की ?' हम पूछलिअनि तं अपन प्रौढ़ पड़ोसी कविक मुद्रा सं बुझायल जेना हिनके भेटै वला से अगिला पुरस्कार बलजोरी अनचिन्हार जी ल' रहल होथिन।
आब एकर कोन जवाब ?
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(उचितवक्ता डेस्क)
४ मइ,२०१९.
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