ग़ज़ल
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तही भरोस पर छी
अहीं उमेद पर छी।
लीखि क' राखल अछि
जखन हो से पढ़ि ली।
इ उदासी नै नीक
बांटि ली एके रती।
बाट मे रौद कड़ा
इजोरिया डेग करी।
एहिना मजरी फे'र
फेर एहिना फऽड़ी !
भेंट हो कहियो जं
हम ने कानी अहीं।
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गंगेश गुंजन।
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