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फेर घृणा के प्रेम परास्त जे क'
देलक।
बड़े दुखी भ' गेलाह-ए किछु
लोक !
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(हालेक दिल्ली-प्रसंग।उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन।
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