....ज़ुल्म सरे आम है

ये  कौन है सुल्तान यह कैसा निज़ाम है। बेटी-बहन-मां तक पे ज़ुल्म सरे आम है।

*                                  गंगेश गुंजन (उचितवक्ता डेस्क)

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