छल,पाथर आ मनुष्य अप्रैल 19, 2020 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप गंहीर विस्तृत जल मे जेना पाथर डूबि जाइत छैक तेना निराशाक पसरल अन्हार में मनुष्यक बुद्धि नहिं। से जं। होइतै तं मनुष्य आ जल मे भेद कोना रहितै। गंगेश गुंजन [ उचितवक्ता डेस्क] टिप्पणियाँ
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