मेघ अनन्त इनार अछि

        मेघ : अछि अनन्त इनार              ⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️

मेघ मे अछि अनन्त इनारक जल।

एकहु अर्घी निकालि सकैए अपना इच्छा वा पुरुषार्थ सं मनुष्य ?

आकाशक पेनी सेहो किछु आओर आकाशे दिशि रहैत छैक। जेना रहैत छैक पृथ्वी पर आवश्यकता भरि धरती त'र।

सुखा गेलाक पूर्व धरतीक इनार सं भरि सकैए मनुष्य यथा संभव पानि। 

उड़ाहि सकैए इनार स्वच्छ करबा लय

ज'ल बेर-बेर। 

बचओने राखि सकैए माटि मे कंठक जलस्त्रोत।

मेघ मे जे असंभव से,धरती पर इच्छा भरि मनुष्य रहि सकैए ठाढ़।                      लगा सकैये बंसवारि,                          रोपि सकैए कदम्बक गाछ।

                    🌻               

                गंगेश गुंजन

              [उचितवक्ता डेस्क]


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