प्रेमक नवता

सृजन-कर्म मे सभ सँ कठिन होइत अछि-प्रेम केँ न’व करब आ कहब। हँ, एहि कोरोना-विपत्ति-काल मे हम अरबद्धि क' ई कहि रहल छी।

                      गंगेश गुंजन

                  [उचितवक्ता डेस्क]

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