दीप आ टेमी

टेमी उसका क' दीप कें एक सीमे धरि जरैत राखल जा सकैए। बाती भीजल रहबा लय सतत तेल-घी चाही।                  

                   गंगेश गुंजन,

             #उचितवक्ताडेस्क

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