कवि के एहनो दुनिया आखिर रह' पड़तै : गज़लसन

ग़ज़ल सन

कवि के एहनो दुनिया आखिर रह' पड़तै
नीक बनयबा लय हरदम किछु कह' पड़तै

यदि सपना रखने अछि मन मे पैघ तेहन
सकल चोट राज पाटक से सह' पड़तै

सुसके नहिं हो नव संसार समाजक रचना 
जर्जर पुरना लोक महल के ढह' पड़तै

बड़ बिषाह बहि रहल बसातक राजनीति कें
नवका चानन-वन मे बदल'-बह' पड़तै

फगुआ आबि गेल अगिजा कें ज्वाला मे टूटल कोड़ो-काठ सबहि के डह' पड़तै

यावत् हो संसार अपन रहबा योग सुन्दर 
कवि-कबीर के निशि-दिन जागल रह' पड़तै

                 गंगेश गुंजन         ‌‌
            #उचितवक्ताडेस्क।

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