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स्मृति आ वर्तमान
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स्मृति
जोड़न जकाँ
होइत अछि जे
पौर क' पूरा वर्तमान के
दही बना देत।
कउखन से,
ओरिका सँ औँट-औंट क'
खोवा क' दैत अछि।
फटाओन तथापि नहिं करते।
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#उचितवक्ताडेस्क। गंगेश गुंजन
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