| दादा-पोता आ पेटीएम |
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एक टा समय औतैक जे बेटा-
पोता केँ एतबा फुर्सति नहिं
रहतै जे पेन्शनक रुपैया
निकालय दादा संगें बैंक जाय तंँ
दादा-दादीक औषदो कोना
औतै ? तेँ मात्सर्य मे प्रकृति जननी
प्राकृतिक न्याय जकाँ ई- पेटीएम/
ऑनलाइन भुगतानक सुभीता
कय देललिहें। भने बड़ अलच्छ
कोविड मुदा ऐ व्यवस्था मे ओकरो
योगदान केँ आभार पूर्वके स्मरण
राखक चाही।
🌼 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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