🌈 डेगा डेगी
•
हमहूंँ जन्म लेलौं पृथ्वी पर -
मायक कोखि सँ जेना जन्म लैए
आन प्राणि !
जखन नहिं रहय तखन तँ नहिएंँ रहय
जखन बोध भेल तंँ लोक,परिवार
जखन-तखन बाज' लागल हमर देह,
बयस,कपारक आभा मे कछमछ करैत
हमर भवितव्य।
विद्योपार्जन सँ ल क'
धनोपार्जनक अनन्त रत्न सिन्धु
हहराइत छल ताही मे।
कय काल हमहूँ सैह देख' लागी -
रत्न सिन्धुक भविष्य,जखन कि
हम फ़ोटो पर्यंत ने देखने रही
कोनो सिन्धुक।
मात्र सुनने रही प्रात संध्या
लोक समाजक मुख सँ श्लोकबद्ध
प्रार्थना मे कृपा सिन्धु,दया सागर
इत्यादि।
जन्मल रही तंँ मौलिक नाम भेटल।
साबिक गाम भेटल।
जाति भेटल धर्म भेटल। भाषा आ ख्याति भेटल जे सभ टा रहय
अंततः देसेक भीतर जे देस सेहो
हमरा
जन्महिं सँ भेटल।
पछाति,
स्कूल कालेज मे नामांकन काल
भरै वास्ते
एहि सभक फुट-फूट कॉलम
भेटल-
एक टा,राष्ट्रीयता!
राष्ट्रीयता इत्यादिक फॉर्म मुदा
हमर अग्रजे गण भरैत रहलाह।
कहाँ रहय बोध किछु, तें
किछुओ ने रहय कथुक संस्कार।
ल' द' क' बुझल रहय जे
'पयर त'र चुट्टिओ पड़ि जाय तँ
करी
पश्चाताप-प्रायश्चित तत्काल !'
माएक कहल रहय।
यद्यपि कय काल उठि गेलाक
उपरान्तो नहिं रहय पनपिआइओ
भेटबाक कोनो आस किन्तु
प्रायश्चित तत्काल !
सेहो नहि बुझाएल कठिन,नेना रही तँ
देखि-देखि क' कतेक उठबितहुंँ डेग
पयर त'र पड़ि जाइत चुट्टीक
कतेक करितियै रक्षा ?
हँ,सभ दोस्त मिलि क' फकड़ा प'ढ़ी-
'बाबा यौ,
चुट्टी के झगड़ा छोड़ा दिय' यौ !'
जन्मदिन,मासक मास,बर्खक बर्ख
दस बर्ख मे नेनपन,किशोर में।
किशोर युवा मे। युवा अधबयस-
प्रौढ़़ मे विलीन होइत चलि गेल।
कहियो ने ध्यान गेल-
ई सब की भेल !
प्रारम्भ कें आगाँ,आगाँ कें आओर
आगाँ, गीड़ैत गेल…
गीड़ि क' पचौलक आ थोड़े माँजि-
मजगूत बना क' आगाँ क' बढ़बैत
रहल जेना,
ब्राज़ील टीमक फुटबॉल प्लेयर
अगिला खेलाड़ी कें दैत छैक पास
गेन गोल पोस्ट मे धरै धरि!
••
(रचना: ११.०७.'२०१४ई.
पुरान डायरी सँ)
•
गंगेश गुंजन, #उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें