💤 । ग़ज़ल सन । 💤
ढीलम-ढालम कल-पुर्जाक इ
गाड़ी जीवन।
अकस्मात रुकि जाइत कतहु
सवारी जीवन।
•
कोनहुँ टा किछुओ निश्चित न
मार्ग एकर
पथ अनन्त संबलक तुच्छ
तैयारी जीवन।
•
असल कथा कविता प्रेमक
पोथी ने गीत
शोक,दुःख, झगड़ा घृणाक
अखबारी जीवन।
•
बैसल कोनो बटोहिक थाकल
तन्द्रा मे
बीच बाट थिक पोटरी के
बटमारी जीवन।
•
कम संँ कम भरि गामक छल
बेसी भरि विश्वक
आब एखन असकर सबहक
परिवारी जीवन।
•
राजनीति सँ ल' क' जीवन
धर्मक सब नऽव
दास भेल एकेक लोकक
दरबारी जीवन।
•
किछु निजता नहिं,ओ ममतो
नहिं जीवन मे रस
केहन भेल इ तंत्र समाज,
वेवहारी जीवन।
• •
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें