💥
हम नहिं कहलौं स'ब नऽव पहिने हम्हीं
कहलौं
जे हम कहलौं नऽवे कहलौं,हम से
कहलौंहें।
•
होइतहिं रहल हमर भरि जिनगी
अगिलग्गी
आंँखिक पोखरि सुखागेल सब
मिझबै-ए मे।
•
मरणक मूल्य रहैत तंँ ओकरो
बहुत दोकान वोभेटैत
जीवन रहितय लऽग एखन जे
हाथसँ बाहर अछि।
•
रूसि गेली कमला घुरि कऽ नहिं
अयली फेर ई गाम
तें की अद्यपि हृदय -धार केर
मिथिला प्रीति बहैए।
•
धयल रहय तंँ छुच्छ कोनो एक
वस्तुअछि- कलम
चलऽ लागय तँ 'माँ','गोदान' आ
'चित्रा' अछि।
•
हाथक चिनगी पझा रहलअछि,
दुःख होइए
कलमो जेंँअलसा रहलय हम तेंँ
उदास छी।
••
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें