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एना बबाजी ने होइत ओहो
प्रेम द’ बूझल रहितैक पहिने!
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निवेश भऽ गेलय आब सम्बन्ध।
आसरा देत जे किराया लेत।
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सत्ताक ताल पर नेता नचनियाँ। बाँकी लोक विकासक हरमुनियाँ।
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छोड़ि जे गेल से की भेल अपन
संग रहि गेलय से आन कोना। •
भीजि गेलय आँखिक कोर किएक ज़रूर कहि न सकलौं बात कोनो।
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बाज अयलौं एहन सिनेह संँ हम नोरे मे नहाइत जीवन बीतल।
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धैर्य संँ काज नै चलैये आब।
छीनि लेबाक ई जमाना छैक।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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