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पार्टी तार्टी सब
व्यापार
मुद्दा तँ
लोकक अधिकार।
भाषा धर्मक नाँगट देह
राजनीति तँ
आर उघार।
इ दल ओ दल
एक-दोसराक
घाराजोड़ी
भेल प्रगाढ़।
खेल खेला रहलय मौसिम
पूसे मे भेलय आषाढ़।
कतहु जाइ मे कोन खुशी आब
के
ता कै त
हएत
बाट मे ठाढ़।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क
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