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ने मधुबनिए अछि मधुबन्नी ने रहलय गामे आब गाम
कतोक बेर चिन्ता पढ़ने छी हमहूँ लिखने छी कय ठाम।
कहिया छूटत छाती पीटब बात सोचि क' नऽव-पुरान
प्रिय अछि तँ से युक्ति करू घुरि आबय फेर मिथिला के नाम।
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#उचितवक्ताडेस्क। गंगेश गुंजन
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