🪂 गाम जाएब तँ… 🪂
(बाल मन-कथा )
गाम जाएब तँ ई करब
गाम जाएब तँ ओ करब।
दशमी मे मेला देखब
लाल पियर फुकना कीनब।
मूढ़ी कचरी खायब लाइ
नचबै लय लट्टू आनब।
आड़ि धूर टहलब ग' बाध
रंग-रंगक चिड़ै देखब।
सब संगी खेलब कबडी
भरि मन पोखरि मे चुभकब।
रंग बिरंगक तितली संग
भरि दुपहरिया खुब दौड़ब।
बाध-बोन गाछी-बिरछी
आड़ि धूर भरि मन घूमब।
गर्मी छुट्टी मे जँ जाएब
कौवा सँ कलमो ओगरब
रहबे करत गुलेंती ने
बानर कें तही सँ डराएब।
अन्हर मे ख'सल जे सब टा
कलम महक टिकुला बीछब।
मधुरी फूलक बीया आनि
गमला मे ऐ ठाँ रोपब।
काकी बाड़िक फरल जँ हयत
नुका-नुका लताम तो'ड़ब।
टाटक दोगे हाथ बढ़ा क'
झख्खा लय लोंगियो तोड़ब।
मुदा सता रहल'य इ ड'र
माँक मारि सँ कोना बाँचब ?
जँ काकी देलथिन उपराग
तक्खन कोन उपाय करब?
आब गोठुल्लो कहाँ रहल
खोपड़ी मे जा नुका र'हब।
🙆
🧑🦯 🧎 🤹 🤼 ⛹🏿♀️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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