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राति बड़ घनघोर गेल
भेल तँ कोन भोर भेल।
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काल चक्रक तमाशा मे
सीयल मनुखक ठोर भेल।
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बजट देशक भेल ई की
चौबीसक संगोर भेल।
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कहै लय बड़ बड़ सरंजाम
गरिब हाथ तँ बंगोर भेल।
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क्यो कहथि भारी विकास
ओ कहथि जे अंगोड़ भेल।
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ओम्हर मुँह फुलौने ओ
एम्हर सब विभोर भेल।
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तय करय सब लोक अपनो
समय मृदु कि कठोर भेल।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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