° ग़ज़लसन °
ने हम लीखै छी अनका सन
ने लीखै छथि क्यो हमरा सन।
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शत सहस्र कवि लिखि क' गेला
बंचला जे लिखलनि अपना सन।
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सृष्टिक उपजल सबहि कला मे
हो सुन्दर सब,नहि कविता सन।
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ओकर मोन जे डॉक्टर बनितौं
एकर म'न जे अभिनेता सन।
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परम प्रतापी राजनीति मे
ओ चाहय होइत नेता सन।
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गाम-गाम कतोक चन्द्रमुखि छथि
लेकिन नहि हमर चन्द्रमा सन।
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सब चाहैए ईश्वर भ' जाइ
गुंजनजी चाहथि देवता सन।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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