🍂 अर्थात्
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एक टा दुपहरिया मन पड़ल।
बड़का माय बाड़ी सँ चोरा क'
तोड़ल
डम्हक लताम,सुगंँधि,बालसंँगी आ
झक्का मन पड़ल।
अर्थात्,
बाँचल छी…
🌿 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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