|| ग़ज़ल सन ||
सब किछु ने किछु मे बाझल अछि
जीवन,यापन मे बाझल अछि।
राज काज किछु अफ़सर मंत्री
आर प्राप्ति कृत मे बाझल अछि।
अपन ब्योंत मे व्यस्त प्रकाशक
लेखक लीखै मे बाझल अछि।
युद्ध थमल नहिं रूस उक्रेनक
चीन अम्रीका मे बाझल अछि।
चारिम लोकतंत्र स्तम्भहु
पक्ष विपक्षे मे बाझल अछि।
सत्ता शासन लोक प्रशासन
मत विज्ञापन मे बाझल अछि।
आम चुनावक गहमागहमी
जनता दुविधा मे बाझल अछि।
टिकटार्थी बड़का नेता केर
चरण वन्दना मे बाझल अछि।
पछधर बेसी अही व्यवस्थाक
किछु सब बदलै मे बाझल अछि।
बड़ विखाह सब किछु भ' चुकलय
किछु निर्विष हो,मे बाझल अछि ।
• गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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