| ग़ज़ल सन |
🌼
नवे नव सन भेल लगैए
दिन इहो चलि गेल लगैए।
स्वप्न नित्य आबो अबैत अछि
पुरने-धुरने खेल लगैए।
ठमकल बीच बाट मे भंगठल
डिब्बा-जीवन रेल लगैए।
ने हम ई ने वैह लगै छी
कयल युक्ति सब फेल लगैए
हम कोनो कि अपराधी छी
तैयो जिनगी जेल लगैए।
पागो डोपटा अंगा,जुत्ता
बेछप सब बेमेल लगैए।
दिव्य बोध गुंजन कहैत छथि-
'सब किछुए धुरखेल लगैए।'
°
(यदि मक्ता तँ - ई एखने भेलय।)
•
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। २९.०७.'२३.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें