📕 फेसबुक पर जन्मोत्सव !
फेसबुकक प्रतापे बहुत दिन सँ मन मे एक टा बात खटकैए। जन्मदिन मनायब जखन एतेक अपरिहार्य सामाजिकता भइए गेलय तँ एकरो अपना परम्परा आ व्यवहार मे समस्त पारिवारी उत्सव किएक ने बना ली ?
तखन अपने कहू जे कोनो सन्तानक छठिहार कि नेनाक नामकरण माय-बाप, अभिभावक करैत छैक कि ओ नेना अपने करैए 😄? तहिना दादा दादी,माय बाप अपन बर्खी अपने करै छथि कि बेटा-बेटी करैत छनि?
अर्थात हमरा भावना होइए जे नवका खाढ़ीक लोक कें अपन जन्मदिन अपने जे मनबऽ पड़ैत छैक से जेठ वर्ग हमरे लोकनि कें किएक ने करबाक चाही। बहुत गोटय निजगुत अपन परिवार लेल तँ करैत छथि से भिन्न विषय। नवतुरिया रचनाकारक ‘फेसबुक जन्मदिन’ अग्रज पीढ़ी-हमरा लोकनि केँ मनयबाक चाही।व्यवहार सम्भव स्तर पर जिनका जैह जूड़य ताही ब्योँत सँ।आखिर पुरनो दिन मे अपना स्थिति- पातक अनुसार बताशा जिलेबी सँ ल’ खाजा-मुँगबा आ पँचमेर मधुरक व्यवहार तँ छलैके।
हँ एहि अंतरराष्ट्रीय रूपें पसरि गेल जटिल डिजिटल युगजीवन मे तकर सुचारु प्रारूप अर्थात मनयबाक रूप की हो से विचार कयल जा सकैए। ओना एक रती समस्या तँ छैक जे नवतूरक रचनाकारक
टीपना कत’ सँ आओत ? मुदा कोनो बात नहिं। डाक्टर रमानन्द ‘रमण’ जी छथि ने। ओ तंँ कहिये देता।
हमरा तंँ नै चिन्ता। हमरा लग एकाधिक अनुज पीढ़ी रचनाकारक फोटो अछि। अपनो लोकनि बहुत गोटय लग होएबे करत।
हम पुरान लोक तँ एकरे बताशा-जिलेबी बना लेब 😃। शुभाशीष क’ देबै।
की विचार फेसबुक समाज ?
ओना अहाँ लोकनिक मत बुझबाक प्रतीक्षा रहत।
🌿🌿 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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