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पुरना काटक बहुत वस्त्र अछ पहिरै मे हिचकै छी आब।
एहन जमाना मे शाश्वत सत्यहु पुरने-धुरने भ' गेलय।
कहबो रहिए गेल जरूरी कते बात छल, अछि मोने
भेटल आब समय कहितौं तँ विषये सब पुरान भ' चुकलय।
|🛖|
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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