एतेक टा नहिं रहथि विद्यापति !
त्रिदिवसीय दूदिवसीय समारोह मना-मना क’ हमरे लोकनि हुनका एतेक टा बनौलिअनिहें। कारण यतबा लीखि क’ ओ एतेक टा भ’ गेल छलाह तकरा बाद तँ नै लिखलन्हि किछु। तेरम-चौदहम शताब्दी कहिया कत’ ने बितलै। तात्पर्य ई जे हमरा लोकनि हुनका महान नहिंयों मनौने रहितिअनि तथापि ओ महाने छलाह।
देखला सँ बुझाइ छैक जे हुनका बाद कदाचित महान होयबाक संभावना समाप्त जकाँ भ’ गेलय। कारण जे भाषा मे तँ निरन्तर एतेक रास एतेक एतेक श्रेष्ठ कविक आगमन होइत रहल…जिनकर सेहो जन्मदिन छनिहें। आधुनिक मैथिली धरि मे एखन पर्यंत ओहन कयटा कविक जन्मदिन मना-मना क’ श्रेष्ठता श्रेण्यताक ओ चेतना धारा अनवरत प्रवाहित राखल जा सकैत छल…
जखन कि आइ काल्हि हमरा तँ लगैए जे जन्मदिन पुण्य तिथि मनयबाक एहि पद्धति प्रक्रियासँ भरिबर्ख अनवरत जन्मदिन,पुण्य दिवस मना-मना क’ कोनहुँ भाषाक केहनो कवि कें महान् बनाओल जा सकैए। मैथिली मे तँ अओर। हँ,तकरा वास्ते अवश्ये सब सँ पहिने वित्त चाही। विद्यापति कें सौभाग्य छलनि जे तकर ब्योंत समर्पित समाजक सक्षम लोकहि संग साधारण लोक,गरीबो गुरबाक योगदान सँ श्रद्धापूर्वक सहजहिं होइत रहलनि। और विशेष जे सब पार्टीक प्रान्तीय सरकार तँ छनिहें।
यद्यपि आब तँ बहुत किछु सरकारियो वित्त एवं आश्रयक निर्भरता नहिं।आब तँ बहुत रास लेखक आ कवि स्वयं आत्म निर्भर छथि जे अपने आर्थिक बल पर अपन ‘अवतरण दिवस’ मना सकैत छथि।
मना रहल छथि।
परम प्रसन्नता आ संतोषक विषय जे ई बुद्धि आ साहित्य उद्यम देशक सब भाषा मे लोकप्रिय उठान पर छैक। तेहन कोटिक सक्षम लेखक-कवि कोनो संस्था समिति गठित,पंजीयित करा क’ सभतरि सुचारु रूपें क’ रहल छथि।
प्रगतिक एहि रफ़्तार मे शीघ्रहि ओहन साहित्य सेवी बलें मैथिली भाषा समेत साहित्य कें अंतरराष्ट्रीय स्तर धरि पहुंँचै मे हमरा तंँ संदेह नहि बुझा रहलय।
अजस्र शुभकामना।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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