असली-नकली।
“जाहि बुद्धजीवी,कवि- साहित्यकार,कलाकार वा पंडित के क़ब्जियति नहिं रहैत होइन तनिका नक़ली बुझब।”
हमर प्रिय मित्र समाधान प्रसाद जीक निष्कर्षो सब अद्भुते रहैत छनि।
सुखद समाचार जे सफलता पूर्वक यू.एस.सँ घुरि पटना लैण्ड क' गेलाहय। बेटा जबर्दस्ती संगे ल’ गेल छलनिहें। अयला हय तँ धोधि सेहो विकासोन्मुखे छनि। वीडियो कॉल मे प्रसन्न बदन मुखानन! एतावता बेस सुख सुभीता मे छलाह। परन्तु ताहि सँ की अपना देशक भूमि पर जे नहिं छलाह।बेटा कें अकच्छ क’ देलनि हमरा जाइक ब्यौंत करू।
उसाँस तेना छोड़ि रहल छलाह जेना बेटा-पुतहु लग सँ नहिं ‘जहल’ सन छुटि क’ आबि रहल छथि। फ़ोन पर परम हर्षित मन सँ सूचना द’ हमरा परसू राति उपकृत कयने रहथि।काल्हि स्नेहातिरेक मे बड़ी काल गपशप सेहो भेल।देश अयलाक बाद पेट साफ़ नहिं होइत छनि से तकलीफ प्रगट करैत किंचित फिकिर मे तँ बुझयला मुदा तत्क्षण फेर अपने समाधान सेहो प्रस्तुत करैत वैह निष्कर्ष देलनि जे-
‘ओना क़ब्ज़ियत नहिं रहल तँ बुद्धजीवी की भेलहुँ? कवि भने नहिं हम,बुद्धि जीवी’ तँ समाज मे अगाध छीहे।'
समाधान बाबूक ई विलक्षण निष्कर्ष तँ शुरू मे कहिये देने छी।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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