🛖 | खरड़ा
बाढ़नि सँ काज चलि गेल रहितय तँ गामक गृहस्थ खरड़ा किएक बनबैत ?
•। आब ने गाय बड़द ने थैर रहलय ने दलाने ओ घूर त'र बैसथि से गामो नहिं लोक तंँ सहजहिं कतऽ सँ।
।🌓🌿 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें