📕|| साहित्य मे हम
कविता मे किछु आलोचक
बूझै छथि हमरा अमुक स'न,
कथा कही तंँ हमरा ओ मानै छथि
आरो किनको सन। साहित्यक
दुनिया मे जीयैत देखल बेसी कवि
उपमे मे। मात्र गुंजनक गाम अपन, कृति कें मानय गुंजन सन।
🌿
🌺 गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें