मछभुल्लुक -मछखौक

🌸          मछभुल्लुक-मछखौक !
   एक टा मैथिल एम्हर- ओम्हरतकलनिआ जमौड़ा दैक भाव भंगिमा मे बड़े उद्गार सँ बजलाह :
  ‘माछ खयला पर निन्न बड़ अबैत छैक।’
  ‘हँ, कक-कहियो- कक्कहियो क्क खा-आएब तँ नि-निन्न हआओत ! 😊!’(हँ,कहियो काल खायब
तंँ एहिना निन्न आओत)
  ठामहि बैसल एक तोतराह सज्जन टीभैत कहलथिन। माछक चर्च पर कतहु दोसर मैथिल कें अभिमान थम्हल जाय।
अप्रतिभ जकाँ भेल पहिल सज्जन टोकलखिन -
  ‘अपने तंँ बड़का मछखौक लगै छी। खाइत काल काँट तँ बड्ड गड़ैत हएत?’
  ‘क्कि कि-एकक ?’ सज्जन मछखौक होएबाक अपना प्रशंसा पर मोहित होइत पुछलखिन।
‘एतेक तोतराइ जे छिऐक !’ कहैत पहिल सज्जन तेजी सँ घुसकथि कि दोसर सज्जन रेवाड़लनि…
   तकरा बाद दृश्य की रहल हयत से अपने लोकनि सेहो अंजाद क’ सकैत 😃।
    बंगालीए नहिं,तोतराह मैथिलो तेहनाहे।
                  💐🌺🌿🌺💐
     एहू नववर्षक शुभकामना आ बधाइ।
                        🕊️🌿                                                गंगेश गुंजन 
                #उचितवक्ताडेस्क।

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