•§• सम्बन्धक गीरह
कतेक गोटेक कें देखलिअनि जे अपन पूरा जीवन सम्बन्धक गीरहे खोलै- सोझरबैए मे खपि जाइत छनि।
तेँ,सम्बन्ध मे गीरह पड़बे नहिं करय तेहन चेतने किएक ने राखी।
मुदा,रोचक विडम्बना अछि जे सम्बन्धक ई गीरह लेखक,कवि, बुद्धजीवी-विद्वान लोकनि मे बेसी भेटत,जनसाधारण लोक मे कम्मे।
कानि सधबै मे तँ साहित्यक कतोक विभूति तुच्छ राजनीतिक नेतहु लोकनिक कान कटैत छलाह आ छथि…
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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