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गेल बर्ख चलिए नहिं जाइत छैक…
• गेल बर्ष केँ समय नहिं, दुरागमन भ’ क’ सासुर गेलि बेटी बुझू। बेर विपत्ति मे अबैत रहत कुशल- क्षेम जकाँ। माए लय नव काटक नूआ-आँगी संगें, कखनो बाप लय हाथक बीनल स्वीटर, रोइयाँ वाला मोलायम ऊनी मोफ़लर जकाँ।
पढ़ै-कमाइ लय विदेस गेल बेटाक,नवका वर्षक आरम्भ पर अबैत ओवर सीज शुभकामनाक फोन,सम्भवतः ब्राण्डेड वस्त्रक पार्सल,यात्रा आ पर्यटनक मोहक वीडियो मे भरि कैलेण्डर बर्ष।
आब एखन चलत किछु दिन-ई
स्मार्ट फ़ोन विलास !
पावनि-तिहारक सब अवसर पर,
गोर लागय,कखनो चेतबैत फोन जकाँ-
‘ऐ बेर पछिलो बर्ख संँ बेसी शीतलहरी पड़ै छै।ओरिया क’ घरे मे रहै जाएब। पछिला साल एही मे दुखित पड़ल रही। मोन अछि ने?’
ध्यान रखै योग्य वर्तमान जकाँ,
ज़रूरी औषदक नाम, भविष्य जकांँ आओत बेटी।
हम एकरो साश्रुए विदा कयलिएकय।
कतहु रहत। देस मे तँ रहत।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
३जनवरी,’२४.
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