📕 साहित्योत्सव : २०२३.
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काल्हि ई बेर साहित्य अकादेमी मे रही। साहित्य अकादेमीक मैथिली पुरस्कार काल्हि प्रो.बासुकी नाथ झा जी कें विधिवत प्रदान कयल गेलनि।हमरा एकर संतोष अछि जे प्रिय संजय झा,अमित आनन्दक संग ओहि ऐतिहासिक सुअवसर पर हमहूँ उपस्थित रही।बासुकी बाबू कें साक्षात बधाइ देबाक सौभाग्य भेटल।
मुदा,
काल्हिए संँ आन्दोलित क’ दै वला एक टा मैथिली प्रश्नो सँ बहुतउद्विग्न छी।प्रश्न अछि, सुनैत छी जे दिल्ली, नोएडा गुड़गांव मे कतोक लाख मैथिल रहैत छथि।आब तँ एन.जी. ओ. तरहक मैथिली सेवी संस्था पर्यंतक संख्या दर्जनों हो तँ कोनो आश्चर्य नहिं। राजधानी कें पर्याप्त मात्रा मे मैथिली सेनानी आ एक्टिविस्ट रहबाक सौभाग्य सेहो छैक। तखनो ऐन साहित्यअकादेमी पुरस्कार उत्सव काल सौंसे सभागार मे दीवालीक फुस फुस्सी फटक्का जकाँ मात्र दस बारह जोड़ा हाथक थपड़ी किएक बाजल ? पूरा नहियों अधो हॉल तँ थपड़ी सँ गनगनाइत ? गनल गूथल थबर-थबर थपड़ी..
एहना मे चित्त बड़ उदास होइत छैक !
तथापि,
🌺|🌺 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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