हम सबजन लोक

लोक तँ हम हृदय सँ सबजन छी परन्तु नोंत हम सबजना नहिं मानैत छियै।
(फगुआ छोड़ि क') महादोष अछि हमरा मे।
                  गंगेश गुंजन                             #उचितवक्ता फगुआ डेस्क।

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