।। बरियातीक हाथी : नहिं बनी ।।
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समाज हमरा सभक वास्ते बहुत आवश्यक तथा मूल्यवान होइत अछि। हमरो सब समाज लय तेहने आवश्यक छियै। किन्तु परिवर्तनक प्रक्रिया मे लोक,सम्वेदना ओ समझक पीढ़ी बदलैत रहबाक कारण एक समय मे आबि क’ नवतूर समाज अहाँ पर ध्यान नहिं देब’ लगैए। तत्काल से बुझै मे नहिं अबैए।
जाहि क्षण लागय जे नव समाज अहाँक अस्तित्वकेंँ मात्र प्रयोजनवश अपन बरियातीक शोभा यात्रा मे शामिल कर’ लागलए अन्यथा अपना सब व्यवहारमें अनुपस्थित करैए,अहाँक अनदेखी क’ रहलय तंँ अहूँ तत्काल समाज के बिसरि जाउ। समाज अन्ठाबय ताहि सँ पहिने अहीं समाज के अन्ठा दिय’।
तथापि समाज अहाँ केँ बनब’ चाहत किन्तु ‘शोभा यात्राक हाथी’ नहिं बनी। कथमपि नहिं बनी। 👣
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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