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लाल कलम में कारी मोसि
सावधान किछु दुर्घट हयत।
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जहिए संँ लीख’ लगलै कवि लाल
कलम सँ कारी बात
तहियेसँ जनता पर बढ़लै केहने-
केहने दन आघात।
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सब दिन क्यो सम्राटो नहि
सम्राटो सब एक दिन जायत।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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