🤔 एहनो कतहु काण्ड हुअय !
❄️
समाचार आबि रहलय जे-काल्हि एक टा आलोचक फेसबुक पर अपन भव्याकार्षक टटका फोटो देलखिन रहय। उचिते ताहि पर स्वागत,बधाई,अभिवादन आदि साओन भादब जकाँ झहर' लगलनि। मैडम आलोचकाइन अपना व’रक लोकप्रियता पर मुग्ध फोटो पर लिखाइत टिप्पणी सब मनोयोग आ उत्साह सँ पढ़ैत जा रहलि छलीह कि ताही प्रवाह में कोनो नव लेखिकाक प्रतिक्रिया आँखि मे बिजलौका जकाँ चमकलनि।हबर-हबर पढ़लनि। लीखल रहै-
'एहिना मुस्काइत रहू प्रियतम!'
सुनै छी जे तकरा बाद तँ आलोचक जीक परिस्थिति घोर संकट मे पड़ल छनि। एक दिस -
'ई के थिकीह ?'
'कहिया सँ चिन्हारे अछि?'
'कोलकतेक छथि कि कतहु आन ठामक?’ इत्यादि
कनियांँक संदेह आ आरोपक एहन भाला-गड़ाँसक बौछार भ’ रहल अछि।
दोसर दिस -'हम देखनहुंँ ने छिअनि...आदिक सब टा व्यर्थ भ’ गेल जाइत आलोचकक बेचारेक दयनीय स्पष्टीकरण !
असहाय भेल छथि।
घरमे घमसान मचल अछि रतुका गैसो नहिं जरलय। नेना दुनू गोटेक बुनछेकक बाट तकैत भुखले ओंघा क’ सूति रहलनि।
ओना अनुमान कयल जाइत अछि जे ओ नव लेखिका लिखने तँ हेथिन -’प्रियवर’ मुदा आलोचकक उल्लास मे आ ऐ मायावी मोबाइल लेखनक माया मे जत’ अहाँक लिखबा सँ पहिनहि दू टा वैकल्पिक शब्द जोड़ि क’ विर्त रहैए कदाचित ताही मेथिलाम मे ‘प्रियवर’ स्थान पर ‘प्रियतम’ टाइप भ' गेल होइन।
ज्ञातव्य थिक जे,
जें कि पत्रकारिता सेहो आइ तारीख मे अपन कार्य क्षेत्रक बहुआयामी प्रसार करैत यदा-कदा पब्लिक पाठक के उपदेश सेहो देब लागलय ताही कर्तव्य सँ कहि रहल जे एहि महाघटना सँ की संदेश भेटैए ?
संदेश ई भेटैए जे फेसबुक पर जे किछु लिखी से लीखि क’ एक बेर गँहिकी आँखि सँ पढ़ि ली तखने पोस्ट कयल करी।
सम्प्रति हम कथित कोलकतिया
आलोचक जी स्टोरीकें लगातार फॉलो क’ रहल छी। ख़बरिक अपडेट दैत रहब।
बाँकी,शुभदिवस फेसबुक।
😆
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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