पिता पुत्रक संदेशा-देशी

         पिता-पुत्रक संदेशा-संदेशी                                       । •।                          बेटा बड़ भावना सँ पिता लय विशेष प्रकार ओ विन्यासक कुल्फी लेने गेलाह। हाथ मे दैत कहलथिन -’ ई खास तरहक कुल्फी अछि पिताजी। भरिसक नै खेने हयब। हाले मे बजार मे अयलैए।’

स्वाभाविके जे पिता परम प्रसन्न होइत ग्रहण करैत फ्रिज मे रखबौलनि। गपशप परिवारी चर्चात्यादिक बाद बेटा आँफिस चलि गेलथिन।
बुढ़ा के कुल्फी मन पड़लनि। बुढ़ी के कहलनि ‘फ्रिज सँ दिअ तँ ओ कुल्फी।’ पत्नी तुरन्त थम्हौलथिन। पहिने तँ माटिक कनिये टा सुन्दर लोटकीक कुल्फी विन्यास भरि मन देखलनि। फेर सुआदि -सुआइद चम्मच सँ खाय लगलाह। मने मन दिव्य स्वादी विन्यासक प्रशंसा करैत पूरा तृप्त भ’ क’ समाप्त कयलनि।प्रशंसा आ उद्गार मे बिना एको रती बिलम्ब कयने बेटा कें व्हाट्सएप्प पर लिखलन्हि;
‘ई लोटकी कुल्फी तँ जुलुम स्वादिष्ट निकलल। वाह रे वाह। एकरा लोभे तँ रोज़ा राखल जा सकैए यौ।’
‘से तँ आब अगिले साल ने पिताजी !’ बेटा चोट्टहि कहलथिन।
ऐ बेर ई सीजनक तँ आब बीति गेल।’
बेटो तंँ हुनके, पिताक प्रशंसा संदेश मे असली निहितार्थ कें नीक जकाँ बुझैत त्वरित लीखि क’ पठौलनि। पढ़ि क’
पुरना मन पिताक मिज़ाज जकाँ मुंँह नै लटकनि।
‘से बड़ दिव मन पाड़लौं बेटा। मुदा एकर दोकानो आब अगिले सीज़न मे खुजतै की ?’ पिता पुत्र कें अओर त्वरित लीखि पठौलनि।
तुरन्ते हँसैत इमोजी वला संदेश पठबैत बेटा प्रणामी इमोजी सेहो पठौलथिन।
   किन्तु एहि प्रकरणक एक टा अओर पाठ सुनल गेलय।से ई जे- साँझ खन बेटा वैह ब्राण्ड दू टा कुल्फी लेने अयलखिन आ कहलखिन जे सोचै छी पिताजी जे दू टा क’ रोज़ अहाँ लय उठौना क’ दी। भोरे क’ द जाएल करत। पिता कें बिहुँसैत कहलथिन आ आगाँ ई जे ‘हमरा सब लेल परम हर्खक बात जे अहाँ कें पसिन्न पड़ल।ओना तँ किछुओ केहनो आनू तँ अहाँ के नहिएँ पसिन्न पड़ैत रहैए।’ फेर माय कें देखैत पुछलनि- ‘नै माँ ?’ माय समर्थनियांं बिहुँसलथिन।

‘हँ यौ। से अहाँ ठीके कहलौं।से हमर स्वभाव अछि।’ कहैत पिता लोटकी कुल्फी कें नेना जकाँ आतुर भ’ देखैत पुत्र के कहलनि- ‘परन्तु से एखन छोड़ू। कुल्फी अनेरे  पघिल क’ सेरा रहलय। पहिने ई लाउ।’
   पिता के कुल्फी दैत माय सङ्गे पुत्र हँसलाह। इति प्रकरणम्।
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                   गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।

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