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मोनोक माया अपरम्पार
कर्म सुआइत कूटय संसार।
बैसले बैसल कखन,कोन ठाम आ की फुरा जायत आ से कहबा लय व्याकुल भ’ जायत तकर ठेकान नहिं। आब एखने देखू जे हमरा ई की फुरा गेलय आ कहबाक बेगर्ता से भ’ गेलय…जे
सब अछैत किछु सून लगैये
किछु मैथिली छुछून लगैए :
तेँ,मैथिली केँ
आब एक टा-
हिन्दीक कृष्णा सोबती चाही,
पंजाबीक अमृता प्रीतम,
मलियालीक कमला दास सेहो अवश्ये टा चाही।
उर्दूक क़ुर्तुल-ऐन हैदर बिनु मैथिली ?
अपरिहार्य भ’ गेलीहय आब।
जल्दी सँ जल्दी अबितथि बंगलाक महाश्वेता देवी।
भ' तँ रहलि छलीहे-
चलि जाइत रहली-लिली रे,
असमियांँक इन्दिरा गोस्वामी-ओ
अपन उषा किरण ख़ान !
आह !
चलिए गेलीह असमय...।
किछु मैथिली-कोंढ़ी द' रहल देखा तँ रहलय सभक ! देखी फुलयबाक, ओकर
शुभ-सुन्दर बाट देखी।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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