कम अछि एखन कोनो नै गम रहक
ने चाही हरदम कम।
अपनहिं टा लय फिकिर न हो सब
समाज लग नहिं हो कम।
बहुत कठिन ई दुःखक काल लोकक
जीवन रहल विषम।
लोक कें तँ दुसिते रहलौं अपने लय
की केलौं हम।
भेल कोन ई आशावाद बाँकी क’
लेब ओइ जनम।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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