गज़लसन : कम अछि एखन कोनो नै ग़म

कम अछि एखन कोनो नै गम रहक
ने चाही हरदम कम।

अपनहिं टा लय फिकिर न हो सब
समाज लग नहिं हो कम।

बहुत कठिन ई दुःखक काल लोकक
जीवन रहल विषम।

लोक कें तँ दुसिते रहलौं अपने लय
की केलौं हम।

भेल कोन ई आशावाद बाँकी क’
लेब ओइ जनम।
                         ••
                   गंगेश गुंजन                                    #उचितवक्ताडेस्क।

टिप्पणियाँ