गेन, जिनगी गेन!

जनिका जे बूझक बुझबक छनि से 
बूझैत बुझबैत रहथु,
हम तँ जिनगी के हरदम फुटबॉल जकाँ
खेलाइत गेलौं।
                गंगेश गुंजन 
           #उचितवक्ताडेस्क।

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