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लोक द्वारा सय दू सय कोदारि सँ मासो चारि मास मे पैघ सँ पैघ पोखरि तँ खूनि लेल जा सकैए किन्तु कतबो लोक द्वारा कतबो कोदारि सँ कतबो दिनमे माटि खूनि क’ समुद्र बनाओल जा सकैए ? 🌊🌊
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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