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मातृभाषाक अभिमान सेहो बेसी काल,तेहन निश्छल नहिं रहैत छैक जेहन बुझाइत रहैत छैक।बुझै लय कहि सकैत छी जेना कय टा सन्तानो माय सँ छल नै करैए?
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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