🌵
फोसड़ी फोड़ि क’ भोकन्नर !
•
पहिने फोसड़ी फोड़ि क’ भोकन्नर करब कुटीचालि लोकक काज रहय। कालान्तर मे ई स्थानीय छोटका नेताजी लोकनिक वृत्ति भ’ गेलनि। साधारण समाजी लोकक तँ ओहनो ई मैथिल होयबाक अधिकारे रहबे करनि।
आब देखि रहल छी व्यापक रूपें किछु प्रोफ़ेसर तँ प्रोफेसर-कवि- लेखको टाईप लोक मैथिली भाषा आ वर्तनी पर यैह कृत्य करै मे अपस्याँत रहैत छथि।
🌵🌵
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें