📕। भँसिअयबाक बयस आ लग्न राशि।
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कोनो साधारण लोक बूढ़ भेला पर भंँसिया जाइत अछि से कहबी तँ नेनहि सँ सुनैत आयल छी। बयस भेल तँ कयटा देखबो कयलौं।किन्तु कोनो प्रतिबद्ध प्रबुद्ध विचारक कवियो भंँसियाइत छथि से नहिं बूझल रहय।
‘कवियो भँसियाइत छथि’ कहबा मे हमर आशय ई कदापि नहिं अछि जे कवि साधारण नहिं,बड़ विशिष्ट लोक होइत छथि। नहिं। बल्कि सामाजिक आचार विचार आ व्यवहार मे एक रती फराक हएब हुनक प्रकृति नियति छनि। ताहि कारण। कवि नैतिक रूपें किंचित बेसी समाजिक अधिक जिम्मेवारी वला फराक व्यक्ति होइत छथि। बुझि सकैत छी जेना कि परिवार मे जेठ लोक। जिनका सतत चेतन जकाँ रह’ पड़ैत छनि।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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