🍂 ।। किछु दुपंँतिया ।।
🍁🍁
सब अपना जीवन संँ अपन हिसाब
मङ्गैत रहल
हम अपना जिनगी-ए केँ जवाब द’
देलियै।
१४.जन.२४.
२.
गुजर करै लय पितृदेव द’ तँ गेलाहय
सबकिछु
हमहीं बिसरि गेलौं हुनकर रहबा केर
चर्या-बाट।
३१.८.’२४.
३.
भाषा मे चिन्ता बजैत छथि स’र- समाजक
नित्य अपन परिवारी समृद्धि लय मरैत
रहै छथि
*
एहिना चलैत रहत तँ सब किछु एहिना
चलि जायत
अकस्मात एक दिन आओत क्यो सब
टा ल’ क’ चलि जायत।
२७.८.’२४. •••
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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