एक टा दूपँतिया : एते रामनगर जिनगी...

एते रमनगर जिनगी जीयै लय
एतनी टा के और्दा,
औ बाबू, ईश्वर तँ हमरा बहुत 
मखौलिया बुझा रहल छथि।
🌿°
गंगेश गुंजन 
          #उचितवक्ताडेस्क.
         रचना : २१सितं.२०२४.

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