लेखक आन नहिं,खास अपने सन होइछ।

🌵🌵 …लेखक आन नहिं अपने सन होइए।
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  कोनो वर्तमान लेखकक अपन साहित्य केँ 'किनको' सन मानब आ ताहि बोध सँ स्वयं कृतार्थ सेहो अनुभव करब कोनो मौलिक श्रेष्ठ लेखकक उपलब्धि नहिं हुनक कारयित्री प्रतिभाक संकीर्ण सीमा रेखांकित करैत अछि। से पूर्वज लेखक कतबो पैघ आ उल्लेखनीय किएक ने रहथु।
   लेखक केँ सर्वथा ‘अपने’ आ अपनहिं सन होयब,रहब आ लगै मे मौलिक सामर्थ्य छैक ‘किनको सन’ लागब मे कदापि नहिं।
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                        गंगेश गुंजन                                        #उचितवक्ताडे.

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